ये तरीके से चीकू की खेती कर हो जाओगे मालामाल, जाने पूरी डिटेल्स…

By Alok Gaykwad

Published on:

Follow Us

ये तरीके से चीकू की खेती कर हो जाओगे मालामाल, जाने पूरी डिटेल्स…चीकू की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. इसकी खास बात ये है कि इसकी खेती में लगने वाली लागत से दोगुना मुनाफा कमाया जा सकता है. सरकार भी चीकू की खेती के लिए किसानों को सब्सिडी का लाभ देती है. ऐसे में किसान बहुत कम लागत में चीकू की खेती कर सकते हैं. एक बार पौधा लगाने के बाद इसका पेड़ 50 साल तक फल देता है. इस तरह एक बार लगाकर और सालों तक इसके फल बेचकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसकी खेती करके किसान आसानी से 7 से 8 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं।

यह भी पढ़े : – करेले की खेती से कमाना है बम्फर मुनाफा तो करे इन उन्नत किस्म करेले की खेती, जाने पूरी डिटेल्स

चीकू की खेती के लिए जरूरी मिट्टी

चीकू की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी और मध्यम काली मिट्टी अच्छी होती है, जिसका पीएच मान 6 से 8 के बीच हो. वहीं, उथली चिकनी मिट्टी चीकू की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती है. चीकू एक उष्णकटिबंधीय फल है, इसलिए इसे अपने वृद्धि और विकास के लिए गर्म और आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है. चीकू का पेड़ साल में दो बार फल देता है. पहली बार, जनवरी से फरवरी तक और दूसरी बार मई से जुलाई तक. इस तरह, साल में दो बार एक चीकू के पेड़ से फल मिलने से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.

यह भी पढ़े : – जवान लड़को के दिलो में खलबली मचा देंगी ये नई Bajaj Pulsar NS250, देखे क्या होगी गए फीचर्स और कैसा होगा इंजन…

सपोटा की खेती के लिए किस्में

हमारे देश में चीकू की लगभग 41 किस्में पाई जाती हैं. इसमें भूरे रंग की पत्तियां, पीले पत्ते वाली किस्में चीकू की देर से तैयार होने वाली किस्में होती हैं. जबकि पीकेएम 2 हाइब्रिड एक संकर किस्म है जिसे अधिक फल देने वाली किस्म माना जाता है. इसके अलावा, काले पत्ते, क्रिकेट हेयर, बारहमासी और गमले में लगाने वाली चीकू आदि कई किस्में हैं जो बेहतर उत्पादन देती हैं.

सपोटा की खेती के लिए सबसे पहले ये काम करें

सपोटा की खेती के लिए सबसे पहले इसकी नर्सरी तैयार की जाती है. इसके बाद, अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई के पहले सप्ताह में पौधे लगाने के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं. इन्हें जून तक खुला रखा जाता है ताकि गड्ढे के अंदर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाएं. इसके बाद, इसमें गोबर, मिट्टी और रेत को मिलाया जाता है. बारिश के कारण मिट्टी के बैठ जाने के बाद, 1X1 मीटर के गड्ढों में पौधे लगाए जाते हैं. एक हेक्टेयर में लगभग 156 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधे लगाते समय इनके बीच का फासला करीब 8 मीटर रखा जाता है.

इस तरह करें सपोटा की खेती में रोपण

चीकू की खेती: प्रत्यारोपण के एक साल बाद से, हर साल प्रति पेड़ 4 से 5 टोकरी गोबर की खाद, 2 से 3 किलो अरंडी/कaranja खली और 50:25:25 ग्राम NPK प्रति पौधा दिया जाना चाहिए. इस मात्रा को 10 वर्ष तक बढ़ाया जाना चाहिए. इसके बाद, हर साल 500:250:250 ग्राम NPK देना चाहिए. खाद और उर्वरक देने का सबसे अच्छा समय जून और जुलाई का महीना होता है. पेड़ के फैलाव की परिधि के नीचे 50 से 60 सेंटीमीटर चौड़ा और 15 सेंटीमीटर गहरा खड्ड बनाकर उसमें खाद डालना चाहिए. इससे पेड़ को ज्यादा फायदा मिलता है।