ये फसल के लिए वरदान है ये कीटनाशक, घर पर ही गोबर, गौमूत्र से करें तैयार…

By Alok Gaykwad

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ये फसल के लिए वरदान है ये कीटनाशक, घर पर ही गोबर, गौमूत्र से करें तैयार, धान की रोपाई के समय अगर किसान बीजों को शुद्ध करके खेत में बोते हैं, तो इससे नर्सरी स्वस्थ रहती है. साथ ही धान की फसल में कीट लगने का खतरा कम हो जाता है और अच्छी पैदावार भी प्राप्त होती है. आमतौर पर किसान बीजों को सिर्फ रासायनिक दवाओं से ही उपचारित करते हैं. ऐसे में अब वैज्ञानिक बताते हैं कि किसान बीज अमृत नामक उत्पाद को खुद बनाकर जैविक तरीके से बीजों को शुद्ध कर सकते हैं. इससे किसानों को बेहतर अंकुरण मिलेगा और पैदावार भी अच्छी होगी.

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बीज अमृत शुरुआती दिनों में फसल को मौसमी कीटों और बीमारियों से भी बचाता है. इसके साथ ही पौधे स्वस्थ रहते हैं. बीज अमृत के इस्तेमाल से मिट्टी जनित रोगों से भी पौधों की रक्षा होती है. जड़ें तेजी से बढ़ती हैं. ये फफूंद और विषाणु से भी पौधे की रक्षा करता है. जिसके कारण उत्पादन अधिक होता है.

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डॉ. एन पी गुप्ता ने बताया कि अगर आप 100 किलो बीजों को शुद्ध करने के लिए बीज अमृत तैयार कर रहे हैं तो एक ड्रम में 20 लीटर पानी, 5 लीटर गोमूत्र, 5 किलो गोबर, 50 ग्राम चूना और मुट्ठी भर मिट्टी डालकर लकड़ी की डंडी से अच्छी तरह से घोलें. इस घोल को 24 घंटे के लिए रख दें. ध्यान रखें कि गोमूत्र जितना पुराना होगा, उतना ही ज्यादा फायदेमंद होगा.

डॉ. एन पी गुप्ता ने बताया कि धान के अलावा गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा और दलहनी फसलों में भी बीज अमृत का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिससे किसानों को बेहतर परिणाम मिलेंगे.

कृषि विज्ञान केंद्र नियमतपुर के वैज्ञानिक डॉ. एन पी गुप्ता ने बताया कि बीज अमृत एक जैविक उत्पाद है. जिसके इस्तेमाल से किसान रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बच सकेंगे. इसके साथ ही बीजों की अंकुरण क्षमता बढ़ जाती है. बीजों में एक समान अंकुरण होता है.

डॉ. एन पी गुप्ता ने बताया कि बीजों को जमीन पर अच्छी तरह से फैला दें. इसके बाद पूरे बीज पर स्प्रे पंप से बीज अमृत का छिड़काव करें. फिर हाथ से बीजों को अच्छी तरह मिला लें. ऐसा करने के बाद उपचारित बीजों को 6 से 12 घंटे के लिए छाया में सुखा लें. इसके बाद धान की क्यारियां बनाकर और उनमें पानी भरकर बीजों की बुवाई की जा सकती है.