Vastu Tips: सुख-समृद्धि के लिए वास्तु शास्त्र में स्नानघर और शौचालय से जुड़ा है या नियम, जानिए

By charpesuraj5@gmail.com

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Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर के निर्माण और उसमें रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को बहुत महत्व दिया जाता है. वास्तु के मुताबिक घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और घर के लोगों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. वहीं, अगर वास्तु के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो घर में रहने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

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घर के स्नानघर और शौचालय को भी वास्तु में बहुत महत्व दिया जाता है. वास्तु शास्त्र में स्नानघर से जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार स्नानघर और शौचालय निर्माण के कुछ महत्वपूर्ण नियमों के बारे में.

इस दिशा में शौचालय का निर्माण ना करें

वास्तु शास्त्र के अनुसार भूल से भी शौचालय का निर्माण उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं करवाना चाहिए. ग्रंथों के अनुसार, इस दिशा के स्वामी कुबेर देव माने जाते हैं, जो धन के देवता हैं. वहीं, उत्तर दिशा में माता लक्ष्मी का वास होता है. इस दिशा में शौचालय बनाने से घर में धन का अभाव हो सकता है और आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

इस दिशा में भी ना बनाएं स्नानघर

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्नानघर का निर्माण नहीं करवाना चाहिए. ऐसा करने से घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. घर में कोई ना कोई सदस्य हमेशा बीमार रह सकता है.

शॉवर की दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार स्नानघर में शॉवर या नल उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है. इस बात का भी ध्यान रखें कि स्नानघर में آئین (mirror) ना लगाएं क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है.

शौचालय सीट की सही दिशा

वाstu शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार और रसोईघर के दरवाजे के सामने शौचालय का निर्माण नहीं करवाना चाहिए. ऐसा करने से वास्तु दोष का नकारात्मक प्रभाव झेलना पड़ सकता है. शौचालय सीट लगाने के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा को शुभ माना जाता है.

खाली बाल्टी ना रखें

स्नानघर में भूल से भी खाली बाल्टी नहीं रखनी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार खाली बाल्टी घर में दुर्भाग्य को बढ़ावा देती है और काम अधूरे रह जाते हैं.