सरकार का नया प्रयास, किसानो की बढ़ेगी आय, सरकार ने दी बासमती धान की खेती करने की सलाह

By दिगम्बर बर्डे

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कृषि विभाग चालू बुआई सीजन में बासमती फसल का रकबा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की योजना बना रहा है. वहीं, राज्य सरकार उत्पादकों को पानी की अधिक खपत वाले धान से दूर रखने के लिए वैकल्पिक फसलों पर जोर दे रही है. कृषि विभाग ने बासमती फसल की खेती के लिए 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया है

किसानो की बढ़ेगी आय

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बासमती धान का रकबा बढ़ाने के लिए कृषि विभाग ने ‘ किसान मित्र’ को शामिल किया है, जो बुआई के दौरान किसानों को तकनीकी बारीकियां बताएंगे पंजाब का कृषि विभाग मौजूदा बुवाई सत्र में बासमती चावल की फसल का रकबा लगभग 20% बढ़ाने की योजना बना रहा है. कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बासमती की खेती इसी महीने शुरू होने वाली है. कृषि विभाग ने बासमती धान के तहत छह लाख हेक्टेयर रकबा लाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल 4.94 लाख हेक्टेयर था. इसके अलावा, राज्य सरकार ने बासमती फसल के लिए समर्थन मूल्य 2,600 रुपये से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की योजना बनाई है.

किसानो की आय बढ़ाने के लिए सरकार का प्रोत्साहन

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सरकार पानी की अधिक खपत करने वाली धान की फसलों के विकल्प के रूप में बासमती, कपास और दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है राज्य सरकार ने बासमती फसल के लिए समर्थन मूल्य 2,600 रुपये से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की योजना बनाई है. बासमती चावल की फसल को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने ‘किसान मित्र’ योजना शुरू की है, जिसके तहत किसानों को इसे बोने के लिए तकनीकी परामर्श दिया जाएगा.पिछले साल किसानों को बासमती फसल की 3,500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कीमत मिली थी.जिसको मध्यनजर इस बार अधिक उत्पादकों को बासमती धान की खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा

किसानो के लिए सरकार की सलाह

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इसके अलावा, बासमती की खेती करने के दौरान किसानों को तकनीकी बारीकियां बताने के लिए कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षित ‘किसान मित्रों’ को शामिल किया गया है. बासमती फसल का रकबा 2021-22 में 4.85 लाख हेक्टेयर और 2020-21 में 4.06 लाख हेक्टेयर था. पंजाब में हर साल बासमती सहित लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान उगाया जाता है. बासमती मुख्य रूप से अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, पठानकोट और अन्य जिलों में उगाया जाता है. अधिकारियों का अनुमान है कि फाजिल्का और मुक्तसर जिलों में भी किसान इस बार बासमती धान का अधिक क्षेत्र लाएंगे.किसानों को केवल उन्हीं कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी जाएगी जिनकी बासमती फसलों के लिए लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश की गई है.

जानिए बासमाती धान के एक्सपोर्ट के बारे में

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बासमती फसल का रकबा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की योजना बना रहा है. भारत से बासमती का निर्यात 35,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें पंजाब के सुगंधित अनाज की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है.

बासमती धान की खेती मुख्य रूप से अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और  पठानकोट समेत कई अन्य जिलों में होती है. अधिकारियों का अनुमान है कि फाजिल्का और मुक्तसर जिलों में किसान इस बार बासमती धान का रकबा बढ़ाएंगे.