रासायनिक खादों को ना कहें, गोहणी जीवामृत से करें धान की खेती, होगा तगड़ा उत्पादन…

By Alok Gaykwad

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रासायनिक खादों को ना कहें, गोहणी जीवामृत से करें धान की खेती, होगा तगड़ा उत्पादन, धान की खेती खरीफ सीजन में भारत की महत्वपूर्ण फसलों में से एक है. इसकी खपत दुनियाभर में काफी अच्छी है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और झारखंड में खरीफ सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है.

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लेकिन खेतों में लगातार रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इससे मिट्टी में रहने वाले फायदेमंद कीड़े मरने लगते हैं और मिट्टी का pH लेवल बिगड़ने लगता है. बता दें, खेती के लिए मिट्टी का pH 7 से 7.5 होना चाहिए, अगर ये संतुलन बिगड़ता है तो इससे उपज की सेहत के लिए भी नुकसानदायक होता है. जिससे लोगों को गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए किसानों को जैविक खेती की तरफ रुख करना चाहिए.

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अगर आप खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं, तो आपको एक देसी गाय ज़रूर पालनी चाहिए. इससे साल भर खाद खरीदने की जरूरत खत्म हो जाती है. बता दें, देसी गाय के गोबर में ही लाखों की तादाद में माइक्रोब मौजूद होते हैं, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं. आप देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से कई तरह के खाद और कीटनाशक बना सकते हैं.

अगर आप गोहणी जीवामृत तैयार कर लेते हैं, तो आपको रासायनिक खादों की जरूरत नहीं पड़ेगी.

गोहणी जीवामृत खाद ऐसे बनाएं

गोहणी जीवामृत बनाने के लिए आपको लगभग 100 किलो देसी गाय का गोबर, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और 1 किलो पेड़ के नीचे की मिट्टी चाहिए. इन सभी चीजों को आपस में मिलाकर एक घोल तैयार कर लें. अब इस मिश्रण में 5 लीटर गोमूत्र डालकर इसे अच्छी तरह से गूंथ लें, ताकि गोहणी जीवामृत बन जाए. इसके बाद आपको गोहणी जीवामृत की गोबर की ग cakes बनाकर उन्हें छायादार जगह में सुखाना है. किसानों को इसका इस्तेमाल बुवाई के समय या फसल में सिंचाई करने के 2 से 3 दिन बाद ही करना चाहिए. आप इस जैविक खाद को करीब 6 महीने तक सुरक्षित रख सकते हैं.

गोहणी जीवामृत का इस्तेमाल

जब किसानों को गोहणी जीवामृत का इस्तेमाल करना होता है, तो उन्हें सूखे गोबर के उपलों को पीस लेना होता है. इसके बाद एक क्विंटल गोहणी जीवामृत को लगभग 250 किलो सड़े हुए गोबर की खाद के साथ अच्छी तरह मिलाकर धान के खेत में डालना होता है. आपको ध्यान रखना है कि जब आप इसे खेत में डालें, तो उस समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए.

उत्पादन में होगा अच्छा इजाफा

धान के खेतों में गोहणी जीवामृत खाद इस्तेमाल करने का एक और तरीका भी है. आप इसके सूखे गोबर के उपलों को फलों के पेड़ या धान की फसल के नीचे लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर की दूरी पर रख सकते हैं, ताकि खेत में सिंचाई होने पर उसमें मौजूद माइक्रोब सक्रिय हो जाएंगे और पौधे इन्हें आसानी से सोख लेंगे. धान की फसल में गोहणी जीवामृत का इस्तेमाल करने से पौधों की अच्छी ग्रोथ होती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जाती है.