Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी व्रत का क्या होता है महत्व, विधान और आर्थिक परेशानियों को दूर करने के उपाय, जानिए

By charpesuraj5@gmail.com

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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी को भीष्मसेनी एकादशी या भीम एकादशी के नाम से जाना जाता है. ये पर्व जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है. साथ ही उनके लिए व्रत रखा जाता है. इस व्रत के पुण्य से व्रत करने वाले को अचल फल की प्राप्ति होती है. साथ ही, धन-धान्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

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कब है निर्जला एकादशी?

सनातन पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी 18 जून को है. ये पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस व्रत में जल ग्रहण करना भी वर्जित होता है. इसका त्याग किए बिना साधक को व्रत का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता है. इस व्रत का विशेष महत्व है. सनातन ग्रंथों में वर्णित है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से साधक को 24 एकादशियों के समान फल की प्राप्ति होती है.

निर्जला एकादशी की पूजा विधि

इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्रत करने वाले को यश, कीर्ति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. साथ ही, मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. ज्योतिष शास्त्र में एकादशी के दिन विशेष उपाय करने का विधान है. इन उपायों को करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं. अगर आप भी आर्थिक संकट से मुक्ति पाना चाहते हैं तो निर्जला एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें. साथ ही ये उपाय भी पूजा के समय अवश्य करें.

आर्थिक परेशानियों को दूर करने के उपाय

अगर आप आर्थिक परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो निर्जला एकादशी पर स्नान और ध्यान के बाद विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें. इस समय जगत के पालनहार और धन की देवी माता लक्ष्मी को एकाक्षी श्रीफल अर्पित करें. ऐसा करने से साधक पर माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है. उनकी कृपा से साधक के सभी दुख दूर हो जाते हैं.

धन की समस्या दूर करने के लिए निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी की मंजरी अर्पित करें. ऐसा करने से साधक पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसती है. एक बात का ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते या कलियां न तोड़ें. भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए एक दिन पहले से ही तुलसी की पत्तियां摘 (zhāi – pick) लें.

अगर आप मनचाहा वर चाहते हैं तो निर्जला एकादशी के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें. इस समय भगवान विष्णु से धन-धान्य और सौभाग्य वृद्धि की कामना करें.

दही-चावल का भोग भगवान विष्णु और जगत के पालनहार माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय है. इसलिए निर्जला एकादशी के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु को अखंड धान और गुड़ से बना हुआ खीर का भोग लगाएं. इससे लक्ष्मी नारायण जल्द प्रसन्न होते हैं. उनका आशीर्वाद भक्त पर बना रहता है.