Nirjala Ekadashi: कब से कब तक है निर्जला एकादशी, जानिए व्रत, तिथि और पूजा विधि

By charpesuraj4@gmail.com

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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह में किया जाता है. इस व्रत को करने से सभी एकादशियों का फल मिलता है. एकादशी तिथि पर श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर श्री हरि की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानते हैं इस बार निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा.

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निर्जला एकादशी का महत्व

एकादशी तिथि भगवान विष्णु, जो कि जगत् पालक हैं, को समर्पित होती है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. साथ ही सभी पापों से मुक्ति के लिए व्रत भी रखा जाता है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है.

इस बार निर्जला एकादशी की तिथि को लेकर थोड़ा असमंजस बन रहा है. कुछ लोग 17 जून को निर्जला एकादशी होने की बात कह रहे हैं, वहीं कुछ लोग 18 जून को निर्जला एकादशी मनाने की बात कर रहे हैं. आइए, इस लेख में हम आपको बताते हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा.

निर्जला एकादशी कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 17 जून को सुबह 04 बजकर 43 मिनट से होगा. वहीं, इसका समापन 18 जून को सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर होगा. सनातन धर्म में उदया तिथि का अधिक महत्व होता है. ऐसे में निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को रखा जाएगा.

निर्जला एकादशी व्रत का पारण

निर्जला एकादशी का व्रत पारण 19 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट से लेकर 07 बजकर 28 मिनट के बीच किया जा सकता है.

निर्जला एकादशी पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और श्री हरि का ध्यान करके दिन की शुरुआत करें. इसके बाद स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें. अब पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्धीकरण करें. आसन पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें. अब इन्हें पीले फूल और गopi चंदन अर्पित करें. मां लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें. देसी घी का दीपक जलाएं और आरती करें. इस समय विष्णु चालीसा का पाठ करें. साथ ही विष्णु स्तोत्र का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें. अंत में भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं. अगले दिन पूजा करके व्रत का पारण करें.

इस प्रकार आप निर्जला एकादशी का व्रत विधि-विधान से कर सकते हैं और श्री हरि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.