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नाशपाती की खेती कर किसान हो सकते है मालामाल, 4 महीने में हो जाता है फल तैयार, जानिए खेती करने का तरीका

नाशपाती मौसमी फल की गिनती में आता है और इस फल को खाने के काफी फायदे भी होते है। इसमे प्रचूर मात्रा में फाइबर होता है। इसके अलावा इसमें आयरन भी भरपूर होता है, जिसके सेवन में हिमोग्लोबिन बढ़ जाता है। साथ ही नाशपाती के अच्छे उत्पादन से किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कई तरह की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होने के कारण नाशपाती की खेती भारत के उप-उष्ण से सयंमी क्षेत्रों में की जा सकती है। भारत में नाशपाती की खेती करने वाले प्रमुख राज्यों में जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तथा कम सर्दी वाली किस्मों की खेती उप-उष्ण क्षेत्रों में भी की जा सकती है। आइये जानते है नाशपाती की खेती करने की पूरी प्रोसेस।

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नाशपाती की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

नाशपाती की खेती के लिए गहरी मिट्टी और मध्यम बनावट वाली बलुई दोमट उपयुक्त मानी जाती है। यह गहरी, बढ़िया निकास वाली, उपजाऊ मिट्टी, जो 2 मीटर गहराई तक कठोर ना हो, में बढ़िया पैदावार देती है। साथ ही मिट्टी की पीएच लेवल 7 से 8.5 के बीच होना चाहिए। नाशपाती की खेती के लिए 10-25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है। साथ ही वर्षा वाले मौसम में नाशपाती की खेती खूब फलती है। नाशपाती की खेती के लिए 50-75 मिमी वर्षा होनी जरूरी है।

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खेत की तैयारी

इसकी खेती करने के लिए सबसे पहले खेत को मिट्टी पलटने वाले हल या कल्टीवेटर की मदद से 2 से 3 बार गहरी जुताई कर दे। उसके बाद खेत में पानी लगा कर पलेउ करने के लिए छोड़ दें। इसके बाद खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए रोटोवेटर की मदद से 2 से 3 बार जुताई कर दें।

पौधे की रोपाई

नाशपाती की बुवाई जनवरी माह तक खत्म कर लेनी चाहिए। नाशपाती के पौधों की रोपाई से पहले खेत में 1X1x1 मीटर का गड्ढा खोद लें। फिर गड्ढों को भरने के लिए मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद अच्छे से मिलाकर उसमें डाल दें। फिर आखिर में गड्ढों में 10 किलो गाय का सड़ा हुआ गोबर मिला लें। इसके पौधों की कलम लगाकर नर्सरी में तैयार करके जब पौधे 20 से 25 दिन के हो जाए तो खेत में पौधों की रोपाई कर दे। इसकी खेती में बीज की बुवाई करने के लिए खेत तैयार करने के बाद करें। साथ ही इसकी खेती करते समय खेत में खरपतवार की रोकथाम के लिए आवश्यकतानुसार समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना चाहिए।

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खेत की सिंचाई

रोपाई के बाद इसको नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मियों में 5-7 दिनों के फासले पर जबकि सर्दियों में 15 दिनों के फासले पर सिंचाई करें| जनवरी महीने में सिंचाई ना करें। फल देने वाले पौधों को गर्मियों में खुला पानी दें। इससे फल की गुणवत्ता और आकार में विकास होता है।

फल की तुड़ाई

नाशपाती के फलों की तुड़ाई जून के प्रथम सप्ताह से सितम्बर के बीच की जाती हैं। तुड़ाई देरी से होने से फलों को ज्यादा समय के लिए स्टोर नहीं किया जा सकता है और इसका रंग और स्वाद भी खराब हो जाता है। नाशपाती की कठोर किस्म पकने के लिए लगभग 145 दिनों की जरूरत होती है, जबकि सामान्य नरम किस्म के लिए 135-140 दिनों की जरूरत होती है।

नाशपाती की खेती से कमाई

नाशपाती के प्रति पेड़ से औसतन 4 क्विंटल फलों की पैदावार होती है और इसकी कई किस्मों का उत्पादन 6 से 7 क्विंटल तक का होता हैं। इस तरह इसका एक एकड़ में बाग लगाने से 500 से 600 क्विंटल नाशपाती का उत्पादन प्राप्त कर सकते है। नाशपाती की बाजार में कीमत 80 से 100 रुपये किलोग्राम के बीच तक की होती हैं जिससे किसान भाई आसानी से लाखों का मुनाफा कमा सकते है।

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