Namibian Cheetah: चीते और तेंदुए में क्या होता है अंतर ये है दोनों की खासियत

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Namibian Cheetah: चीते और तेंदुए में क्या होता है अंतर ये है दोनों की खासियत आज नामीबिया से 8 विदेशी चीतो को भारत में लाया जाएगा आज भारत के मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में इन चितो का आगमन होगा. श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में उनका पुनर्वास किया जायेगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनमोत्स्व के मौके पर चीतों का आगमन भारत में हुआ है. चीतों को नामीबिया से भारत लाए जाने के बीच लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है कई लोगो को ये शंका है कि तेंदुए और चीते में अंतर क्या है? दोनों देखने में एक जैसे ही लगते हैं. तो आज हम बतायेगे की चीते और तेंदुए में आखिर अंतर होता क्या है हुमकेसे पहचानेगे की चीता कौन है और तेंदुआ कौन तो चलिये देखते है

बनावट है अलग

वैसे तो दोनों की बनावट एक जैसी लगती है परन्तु उनमे बहुत अन्तर होता है चीते के कंधे तेंदुओं की तुलना में लंबे होते हैं. चीते तेंदुए से ऊंचे दिखाई देते हैं. चीते का वजन औसतन 72 किलोग्राम होता है.तो वही तेंदुए का वजन 100 किलोग्राम तक होता है. चीता अधिकतम 120 किमी प्रति घंटे के रफ़्तार से दौड़ सकते हैं. वहीं, तेंदुए बड़ी बिल्लियों में सबसे छोटे होते हैं, हालांकि ये चीतों की तुलना में अधिक भारी और मजबूत होते हैं.

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दोनों की खालो में भी होता है अंतर

चीते की तुलना में तेंदुए अधिक मांसल बिल्लियां होते हैं. तेंदुए अपनी अत्यधिक ताकत का इस्तेमाल शिकार पर घात लगाकर उसको पकड़ने में करते हैं. तेंदुए अपने भोजन की रक्षा के लिए शिकार को मारने के बाद पेड़ पर ले जाते हैं. इन दोनों की खाल में भी बहुत अंतर होता है. जहां चीते की खाल हल्के पीले और ऑफ व्हाइट कलर की होती है. तो वहीं तेंदुए की खाल पीले रंग की होती है. चीते की खाल पर गोल या अंडाकार काले धब्बे होते हैं. तो वहीं तेंदुए की खाल पर धब्बों का आकार निश्चित नहीं होता है.

पंजे भी होते है अलग

चीता और तेंदुए के पंजों में भी अंतर होता है. चीते के पंजे तेज स्पीड से दौड़ने के हिसाब से होते हैं. चीते के पिछले पैर आगे की तुलना में बड़े और मजबूत होते हैं जिससे वे स्पीड से दौड़ सकें. चीते के पंजे सिकुड़ते नहीं हैं क्योंकि उनको दौड़ते समय तेजी से घूमना होता है. वहीं तेंदुए के आगे के पैर पीछे के मुकाबले बड़े होते हैं. इसकी वजह से वो शिकार को खींचकर आसानी से पेड़ पर ले जाते हैं. शिकार को पंजा मारते समय भी उनके बड़े पैर काम आते हैं.