Monday, January 30, 2023
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MP जल संसाधन विभाग ने 126 नवीन सिंचाई परियोजनाएं शुरू की, देश में मध्‍यप्रदेश भी अब सिंचाई के क्षेत्र में विकसित राज्‍यों में गिना जाने लगा है

MP जल संसाधन विभाग ने 126 नवीन सिंचाई परियोजनाएं शुरू की, देश में मध्‍यप्रदेश भी अब सिंचाई के क्षेत्र में विकसित राज्‍यों में गिना जाने लगा है कोरोना काल से उबरने के बाद मध्‍यप्रदेश ने हर क्षेत्र में विकास किया है। इसमें जल संसाधन विभाग भी शामिल है। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के विभाग का दायित्व मिलने के बाद विभाग की सिंचाई झमता में बीते दो साल में 03 लाख 48 हजार हेक्टेयर वृद्धि हुई है। जबकि वर्तमान में विभाग द्वारा 37 लाख 07 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है। तवा परियोजना के कमाण्ड में जायद फसल के लिए 89 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रदान की गई। प्रदेश में दो साल में कुल मिलाकर 126 नवीन सिंचाई परियोजनाएं प्रारंभ की गईं। विभाग द्वारा वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में 840.3 करोड़ की वसूली की गई है। विभाग द्वारा साल 2020-21 में 01 लाख 15 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा था और 01 लाख 16 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई। वहीं 2021-22 के लक्ष्य 01 लाख 70 हजार हेक्टेयर के विरूद्ध 01 लाख 71 हजार हेक्टेयर नवीन सिंचाई क्षमता विकसित की गई। 31 दिसम्बर 2023 तक विभाग द्वारा कुल सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 40 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य को पूर्ण कर लिया जाएगा।


प्रदेश में 126 नवीन सिंचाई परियोजनाएं शुरू –
जल संसाधन विभाग द्वारा मध्‍यप्रदेश में बीते दो वर्षों में कुल 126 नवीन बृहद, मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाएं शुरू की गईं। इसमें चार वृहद्, 10 मध्यम और 112 लघु परियोजनाएं सम्मिलित हैं। इन सभी 126 सिंचाई परियोजनाओं की लागत 06 हजार 700 करोड़ रुपए है। इन नवीन सिंचाई परियोजनाओं से 03 लाख 34 हजार हेक्टेयर नवीन सिंचाई क्षमता विकसित होगी। विभाग द्वारा वर्ष 2020-21 और 2021-22 में 840.3 करोड़ की राजस्व वसूली की गई है। वहीं 2022-23 में सितम्बर तक 266.11 करोड़ की वसूली की जा चुकी है।

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केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से 41 लाख आबादी को मिलेगा पेयजल –
मध्‍यप्रदेश में बहु प्रतीक्षित केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना का जल्‍द कार्य प्रारंभ किया जाएगा। परियोजना को केंद्रीय मंत्री परिषद् की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। 44 हजार 605 करोड़ रुपए लागत की इस केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से मध्यप्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही प्रदेश की लगभग 41 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्‍त होगी। इस परियोजना से 103 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। केन बेतवा लिंक से राज्‍य के 10 जिलों की 28 तहसीलों के 2040 ग्राम लाभांवित होंगे। केन्द्र सरकार ने परियोजना के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किए हैं।


बुन्देलखंड के लिए अटल भू-जल योजना –
मध्यप्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘‘अटल भू-जल योजना’’ प्रारंभ की गई है। 314 करोड़ 54 लाख रुपए लागत की यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों के 678 ग्रामों में क्रियान्वित की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत जनभागीदारी से जल संवर्धन एवं भू-जल स्तर में सुधार हेतु कार्य किए जा रहे हैं।

श्रीमंत माधवराव सिंधिया वृहद् सिंचाई परियोजना –
मध्‍यप्रदेश के ग्वालियर, चंबल अंचल में सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के लिए श्रीमंत माधवराव सिंधिया नाम से नवीन बहुउद्देश्य सिंचाई परियोजना प्रारंभ की जा रही है। परियोजना से प्रदेश के गुना, शिवपुरी और श्योपुर जिले लभान्वित होंगे। 06 हजार 601 करोड़ रुपए लागत की इस परियोजना से 02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। जबकि इसके अंतर्गत 06 जलाशयों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना का सर्वेकार हो चुका है और डी.पी.आर. परीक्षाधीन है। परियोजना के पूर्ण होने पर सिंचाई, पेयजल, मछली पालन, पर्यटन एवं रोजगार के अवसर में वृद्धि होगी। इसके साथ ही क्षेत्र का भू-जल स्तर बढ़ेगा।


माइक्रो इरिगेशन
जल संसाधन विभाग की वर्तमान में निर्माणाधीन अधिकतर वृहद् एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में आधुनिक दबाव युक्त पाईप आधारित सूक्ष्म सिंचाई पद्धति (माइक्रो इरिगेशन) का उपयोग किया जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई पद्धति पर आधारित योजनाओें का निर्माण करने वाला मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है। इस पद्धति में जल का अधिकतम् उपयोग कर पाईप के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाता है। वर्तमान में 55 निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाएं आधुनिक दबावयुक्त पाईप सूक्ष्म सिंचाई पद्धति पर आधारित हैं। इस पद्धति के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन है।

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148 करोड़ की लागत से 25 बांधों की मरम्मत –
जल संसाधन विभाग बांधों की सुरक्षा के लिए पूरी सजगता के साथ काम कर रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश में ‘‘डेम सेफ्टी रिव्यू पैनल’’ गठित है। यह पैनल प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। विभाग के अन्तर्गत बांध सुरक्षा के लिए बांध सुरक्षा संचालनालय स्थापित है। पिछले 05 वर्षों में विभाग द्वारा ड्रिप-प् परियोजना के तहत् 148 करोड़ रुपए की लागत से 25 बांधों की मरम्मत का कार्य किया जा चुका है। मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा बांध सुरक्षा के लिए ड्रिप-प्प् परियोजना को लागू की गई है, जिसके तहत् आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत की जावेगी। इसके लिए विश्व बैंक के सहयोग से 551 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रावधानों को लागू करने के लिये विशेषज्ञ समिति का गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है।

सर्वश्रेष्ठ आपदा प्रबंधन –
जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माणाधीन कारम जलाशय के क्षतिग्रस्त होने की संभावना को देखते हुए श्रेष्ठ आपदा प्रबंधन किया गया। इसमें किसी भी तरह की कोई जन हानि नहीं हुई। इसके साथ ही दोषी अधिकारियों के विरूद्ध तत्‍काल रूप से दंडात्‍मक कार्यवाही की गई और संबंधित निर्माण ऐजेंसियों को ब्लेक लिस्टेड किया गया।


क्षतिग्रस्त जल संरचनाओं की मरम्मत-
विगत वर्ष ग्वालियर, चंबल अंचल में अतिवृष्टि के कारण बांधों एवं नहर प्रणालियों में अत्यधित क्षति हुई थी, जिससे लगभग 08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की सिंचाई प्रभावित हो सकती थी। विभाग द्वारा 01 माह की अल्प अवधि में क्षतिग्रस्त जल संरचनाओं की त्वरित मरम्मत की गई। इसके साथ ही कृषकों को समय पर रबी की फसल हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई।

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