मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री उमंग सिंघार पर लगा गृह हिंसा और दुष्कर्म का आरोप,महिला ने बताया खुद को उनकी पत्नी जानिए क्या पूरी खबर

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मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री उमंग सिंघार पर लगा गृह हिंसा और दुष्कर्म का आरोप,महिला ने बताया खुद को उनकी पत्नी जानिए क्या पूरी खबर38 वर्षीय एक महिला ने थार जिले के नौगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई है।कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री उमंग सिंघार के खिलाफ धार में ही दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य का आरोप लगा है। पुलिस ने केस दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। महिला कहा कि धार जिले में पीडब्ल्यूडी कार्यालय के पीछे स्थित विधायक निवास पर उमंग सिंघार ने नवंबर 2021 से 18 नवंबर 2022 के बीच उसके मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। इतना ही नहीं कई बार दुष्कर्म भी किया अप्राकृतिक कृत्य करने का आरोप भी लगा है.

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किया खुलासा

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38 वर्षीय एक विवाहित महिला ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और गुजरात चुनाव में सह प्रभारी, मध्य प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री और विधायक उमंग सिंगार के खिलाफ धार के नौगांव थाने मे महिला ने आरोप लगाया है कि पीडब्ल्यूडी कार्यालय के पीछे विधायक निवास में उमंग सिंघार ने नवंबर 2021 से लेकर 18 नवंबर 2022 के बीच महिला के साथ दुष्कर्म किया और मारपीट कर अभद्र व्यवहार भी किया। नौगांव पुलिस ने इन सभी आरोपों के आधार पर उमंग सिंगार के खिलाफ आइपीसी की धारा 376, 377 और 498 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। महिला ने विधायक पर अप्राकृतिक कृत्य करने का भी आरोप लगाया है। ।

क्या अपराध साबित होने पर होगी 20 साल की जेल

पुलिस कृत्य की जाँच कर रही है पर इससे पहले जानते हैं कि क्या हैं यह धराये और यह कब लगती हैं

धारा 498(ए)

भारतीय दंड संहिता की धारा 498(ए) पति और उसके घर के लोगों पर पत्नी पर क्रूरता करने के संबंध में लागू होती है। इस धारा का अर्थ यह है कि किसी भी शादीशुदा महिला को यदि उसके पति द्वारा क्रूरतापूर्वक परेशान किया जा रहा है या उसके पति के साथ उसके पति के रिश्तेदार मिलकर उस शादीशुदा महिला को परेशान कर रहे हैं, तब आईपीसी की धारा 498(ए) लागू होती है।

धारा 376

जो भी व्यक्ति, धारा 376 के उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत दंडनीय अपराध करता है और इस तरह के अपराधिक कृत्य के दौरान लगी चोट एक महिला की मृत्यु या सदैव शिथिल अवस्था का कारण बनती है तो उसे एक अवधि के लिए कठोर कारावास जो कि बीस साल से कम नहीं होगा से दंडित किया जाएगा, इसे आजीवन कारावास तक बढ़ा या जा सकता हैं, जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सज़ा।

धारा 377

जो भी व्यक्ति, धारा 377 के तहत दंडनीय अपराध करता है जो किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रिय भोग करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा”।