Makke ki Kheti: मक्के की खेत में कमाना है ताबड़तोड़ मुनाफा तो जाने खेत करने का सही तरीका…

By Alok Gaykwad

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Makke ki Kheti: मक्के की खेत में कमाना है ताबड़तोड़ मुनाफा तो जाने खेत करने का सही तरीका, मक्का हमारे देश की एक प्रमुख खाद्य फसल है। यह मोटे अनाजों की श्रेणी में आती है और इसे भुट्टे के रूप में भी खाया जाता है. मक्के के नर पुष्प पहले पकते हैं। भारत में मक्के की सात मुख्य किस्में पाई जाती हैं।

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  • लई (Popcorn): यह फूलकर खाने वाला मक्का है।
  • मीठा मक्का (Sweet corn): इसका दाने मीठे होते हैं और इन्हें सिं directly भुट्टे के रूप में खाया जाता है।
  • हट्टा मक्का (Flint corn): इसके दाने सख्त होते हैं और पीसने के बाद आटा बनाने में उपयोग किए जाते हैं।
  • मोमी मक्का (Waxy corn): इसमें स्टार्च की मात्रा अधिक होती है।
  • फलीदार मक्का (Pod corn): इसकी फलियों को सब्जी के रूप में खाया जाता है।
  • आटेदार मक्का (Flour corn): यह आटा बनाने के लिए सबसे उपयुक्त किस्म है।
  • दंतेदार मक्का (Dent corn): इसका उपयोग बहुधा पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है।

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मक्के की खेती (Makke ki Kheti)

मक्का की खेती के लिए बलुई म壤 वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, हालांकि यह अन्य प्रकार की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है. यह खरीफ की फसल है, लेकिन सिंचाई की सुविधा होने पर रबी और खरीफ दोनों मौसम में इसकी खेती की जा सकती है। मक्के का उपयोग मुर्गीपालन और पशुपालन में चारे के रूप में भी किया जाता है।

खेत की तैयारी (Khet ki Taiyari)

खेत की तैयारी पहली बारिश के बाद से शुरू करनी चाहिए। यदि गोबर की खाद का उपयोग करना है, तो पूरी तरह सड़ी हुई खाद को पिछले जुलाई महीने में मिट्टी में मिला दें। रबी सीजन में दो बार कल्टीवेटर चलाने के बाद दो बार हैरो चलाएं।

बुवाई का समय (Buwai ka Samay)

  • खरीफ – जून से जुलाई
  • रबी – अक्टूबर से नवंबर
  • जायद – मार्च से अप्रैल

मक्के की किस्में (Makke ki Kismen)

किस्मअवधि (Days)उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर)
गंगा-5100-10550-80
डेक्कन-101105-11560-65
गंगा व्हाइट105–11050-55
गंगा-11100-10560-70
डेक्कन-103110-11560-65

बीज की मात्रा (Beej ki Matra)

  • संकर किस्म – 12-15 किग्रा/हेक्टेयर
  • सम σύν मिश्र किस्म – 15-20 किग्रा/हेक्टेयर
  • हरा चारा – 40-45 किग्रा/हेक्टेयर

बीज का उपचार (Beej ka Upchar)

बुवाई से पहले, बीजों को थिरम या एग्रोसन जीएन जैसे फफूंदनाशक से 2.5-3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।

पौधों के बीच दूरी (Paudhon ke Beech Duri)

  • जल्दी पकने वाली किस्में – 60 सेमी पंक्ति से पंक्ति, पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी
  • मध्यम और देर से पकने वाली किस्में – 75 सेमी पंक्ति से पंक्ति और 25 सेमी पौधे से पौधे की दूरी
  • हरा चारा – 40 सेमी पंक्ति से पंक्ति और 25 सेमी पौधे से