मछली पालन करना हो गया है इतना आसान, कोई भी कर सकता है यह व्यवसाय, जानिए मछली पालन कैसे किया जाता है

By दिगम्बर बर्डे

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ये व्यवसाय ज्यादातर किसान लोग करते है। जिसे करके वे अपनी वार्षिक आय बड़ा सकते है। मछली उत्पादन में भारत दूसरे स्थान पर है। भारत में मछली पालन (Fishery) कृषि से जुड़ा एक प्रमुख व्यवसाय है। हमारे देश में दिन-प्रतिदिन मछली का सेवन करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।हम लोग मछली पालन व्यवसाय करके अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते है।

मछली पालन कैसे शुरू करें

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मछली पालन शुरू करने के लिए आपको कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मछली पालन (Machli palan) के लिए आपको सबसे पहले मछलियों को रखने के लिए तालाब या टैंक की व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद मछलियों के चारे की उपयुक्त व्यवस्था करनी चाहिए। मछली पालन करने के लिए आपको उन्नत प्रजातियों का चयन कर लेना चाहिए। जिससे की अच्छी इनकम जेनरेट हो सके। और मछली खाने वाले की सेहत बानी रहे।

मछलियों के लिए तालाब का निर्माण

मछली पालन में खास बात यह है की इसमें साफ सफाई पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। जैसे की तालाब को समय-समय पर साफ करते रहे। ऐसे जीवो को हमेशा निकालें जो मछली को खाते हो। इसके अलावा जलीय पौधों को भी तालाब में से समय-समय पर साफ करते रहे। समय-समय पर अपने तालाब के जल की पीएच मान की जांच करवाते रहें। जिससे तालाब में रहने वाली मछलियों को हानि ना हो जिससे हमारा कोई नुकसान न हो।

मछलियों के लिए फीड (चारे) की व्यवस्था

चारे की बात की जाये तो अलग अलग मछलियों के लिए अलग अलग चारे की व्यवस्था की जाना चाहिए। अलग-अलग प्रजाति की मछलियों को अलग-अलग विशेष खुराक दिए जाते है। मछलियों की खुराक तैयार करने के लिए चावल की भूसी और सरसों का खल प्रयोग किया जाता है। अगर आप समुचित मात्रा में मछलियों की खुराक तैयार करना चाहते हैं तो दोनों पदार्थों को सामान अनुपात में मिला लें। और मछलियों के लिए चारे का टाइम और डेली रूटीन बना ले। रूटीन के हिसाब से डेली मछलियों चारा देने से मछलिया स्वस्थ रहती है और उनकी सेहत भी अच्छी रहती है
खास तौर पर ग्रास कार्प मछली को अतिरिक्त भोजन के रूप में हाइड्रिला, वैलिसनेरिया, अन्य जलीय पौधे और बरसीम दी जाती है।

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मछलियों के फीड(Feed) के प्रकार

पूरक फीड

पूरक फीड की बात करे तो यदि आप मछलियों को सिर्फ प्राकृतिक फीड देते हैं तो यह आपकी मछलियों सम्पूर्ण पोषण नहीं मिल पाता है। मछलियों के अच्छे उत्पादन के लिए आपको इन्हें पूरक फीड देना होगा। पूरक फीड में अमीनो एसिड की मात्रा उचित होनी चाहिए। पूरक फीड में कम से कम 35% प्रोटीन होना चाहिए और मछली की पूरक फीड में 10.5% कार्बोहाइड्रेट भी होना चाहिए।जिससे उनकी सेहत अच्छी बानी रहे।

प्राकृतिक फीड

प्राकृतिक फीड का उत्पादन मिट्टी की गुणवत्ता और तालाब के पानी की गुणवत्तापर निर्भर करता है। आप तालाब में प्राकृतिक फीड के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उर्वकों का प्रयोग कर सकते है।

तालाब में विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक फीड होते हैं। जैसे शैवाल, फाइटोप्लांकटन, जोप्लैंक्टोन, आदि। फाइटोप्लांकटन विभिन्न मछली प्रजातियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण प्राकृतिक फीड होता है।

जोप्लैंक्टोन भी मछलियों के लिए यह बहुत ही अच्छा फीड होता है। मछली के प्राकृतिक फीड के अच्छे उत्पादन के लिए आप तालाब में जैविक या अजैविक उर्वरकों का उपयोग कर सकते है।

कृत्रिम फीड

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कृत्रिम विधि से बनाई गई खुराक को मछलियों को प्रतिदिन समय के अनुसार सुबह तालाब में कुल उपलब्ध मछली स्टाक के वजन का कम से कम 1 प्रतिशत और अधिक से अधिक 5 प्रतिशत की दर से देना चाहिए।और इसका समय निश्चित कर दे।

मछली पालन के लिए उन्नत प्रजातियां

सिल्वर कार्प

तिलापिया

ग्रास कार्प

रोहू

पंगास

कतला

कॉमन कार्प

मछली पालन से होने वाला मुनाफा

बढ़ती जनसँख्या को देख के बाजार में मछली की मांग दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। अगर आप अच्छे से मछली पालन करते हैं दो आप महीनों में लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप जैसा मछलियों को फीड करेंगे और जिन पर जातियों की मछलियां रखेंगे वैसा ही आपको मुनाफा भी होगा।