गेहूं बुआई के पहले जाने गेहूं की नई वेरायटी, जानिए लोकवन गेहूं की नई किस्मो की खेती से फायदे

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Lokvan gehu ki kheti

Lokvan gehu ki kheti Kaise Kre:आज कल मार्केट में शरबती गेहूं के बाद इस गेहूं की डिमांड बहोत अधिक रहती है, जानिए कैसे करे इसकी खेती ? शरबती गेहूं के बाद इस गेहूं की मांग बनी हुई है बाजार में, जानें इसकी खेती का पूरा गणित गेहूं की खेती इस साल किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है। गेहूँ की किस्मों में, शरबती के साथ, साधारण देखभाल के तहत एक बहुत ही कम लागत और अच्छी उपज देने वाली किस्म लोकवन गेहू (लोकवन गेहु की खेती) है। इस किस्म के गेहूं की मांग भी बाजार में काफी ज्यादा है।

वैश्विक स्तर पर धूम मचा रहा है मालवा गेहूं, शरबती का भाव करीब 5000 रुपए प्रति क्विंटल, इसके अलावा बाजार में लोकवन किस्म के गेहूं का भाव भी ज्यादा है (लोकवन गेहु की खेती), खाने में स्वादिष्ट और मांग में ज्यादा . लोकवन किस्म की खेती बहुत ही सरल तरीके से की जा सकती है, सामान्य देखभाल से लोकवन किस्म की अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है।

लोकवन गेहूं की खेती Lokvan gehu ki kheti

  • मध्य प्रदेश के कई जिलों में लोकवन गेहूं की खेती की जाती है। सामान्यतः तीन से चार सिंचाई के पश्चात इस गेहूं की उपज अच्छी होती है। इसकी खेती करने के लिए बुवाई से पूर्व बीजों को उपचारित कर ही बोयें।
  • बीजोपचार के लिये कार्बाक्सिन 75%, wp/कार्बनडाजिम 50% wp 2.5-3.0 ग्राम दवा/किलो बीज के लिए पर्याप्त होती है।
  • टेबूकोनोजाल 1 ग्राम/किलो बीज से उरापचारित करने पर कण्डवा रोग से बचाव होता है।
  • पी एस बी कल्चर 5 ग्राम/किलो बीज से उपचारित करने पर फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ती है।

सिंचाई Irrigation

  1. जहाँ तक सम्भव हो स्प्रिंकलर का उपयोग करें
  2. विश्वविद्यालय से विकसित नयी किस्मों में 5 – 6 सिंचाई की आवश्यकता नहीं
  3. 3 – 4 सिंचाई पर्याप्त (55 – 60क्विंटल उपज)
  4. एक सिंचाई: 40 – 45 दिनों बाद
  5. दो सिंचाई: किरीट अवस्था, फूल निकलने के बाद
  6. तीन सिंचाई: किरीट अवस्था, पूरे कल्ले निकलने पर, दाना बनने के समय
  7. चार सिंचाई: किरीट अवस्था, पूरे कल्ले निकलने पर, फूल आने पर, दूधिया
  8. मिट्टी की जांच के बाद उर्वरकों को प्रयोग करें। संतुलित मात्रा में समय पर उर्वरक दें। उर्वरकों का सही प्लेसमेंट उत्पादन बढ़ाने में एवं उर्वरक उपयोग क्षमता बढ़ाने में योगदान देता है। उर्वरको को बीज से 2-3 सेमी नीचे डाले। कार्बनिक एवं जैविक स्रोतों का भरपूर उपयोग करे जिससे मृदा स्वास्थ्य एवं उत्पादकता बढ़ती है।

बीज दर Seed rate

क्षेत्र विशेष के अनुसार शुद्ध, स्वस्थ्य, कीट एवं रोग रोधी किस्मों का चयन करें। लोकवन किस्म की गेहूं की बुवाई पूरे प्रदेश में की जा सकती है। समय पर बोनी करे। बीज एवं खाद एक साथ मिलाकर बोनी न करें। देर से बुवाई की अवस्था में संसाधन प्रबंधन तकनीक जैसे, जीरो टिलेज का प्रयोग करें। यथासंभव बुवाई लाइनों में करें क्रासिंग न करें। पौध संख्या अनुशंसा से ज्यादा न करें।

खरपतवार नियंत्रक उपाय समय पर करें। खरपतवारनाशी दवाओं का इस्तेमाल करते समय ध्यान दे कि फसल में नीदाओं की सघनता एवं नीदाओं के प्रकार के हिसाब से रसायन का चयन करें। खरपतवार नाशी दवा का उपयोग मृदा में पर्याप्त नमी होने की दशा में सही मात्रा एवं घोल का इस्तेमाल करें।

कीट एवं रोग नियंत्रक उपाय समय पर करें। Make the insect and disease controller at the time.

गेहूँ फसल की कटाई उपरांत नरवई खेतों में न जलायें, नरवई जलाने से खेतों की मृदा में उपलब्ध लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं का ह्रास होता हैं नरवई की आग से लोगों के घरों में भी आग लगती है। एवं जन व पशुधन हानि की भी संभावना रहती है। गेहूँ की फसल कटाई उपरांत खेतों में समुचित नमी की दशा में रोटावेटर चलाने से नरवई कटकर मिट्टी में मिल जाती है जो कि मृदा के लिए लाभदायक भी है।

अच्छी उपज के लिए यह भी करें Do this for good yield

मिट्टी का परीक्षण करवाएं। परीक्षण के आधार पर नत्रजन, फास्फेट एवं पोटाश की मात्रा का निर्धारण अनुशंसा –
प्रदेश में लगभग सभी जिलों में सूक्ष्म तत्वों की कमी
25 कि.ग्रा./हे. की दर से जिंक सल्फेट का प्रयोग
जिंक सल्फेट का प्रयोग 3 फसल के उपरांत (न की प्रत्येक वर्ष)

मालवा के गेहूं में यह खासियत This specialty in Malwa’s wheat

  • म.प्र. का गेहूँ (Lokvan gehu ki kheti) देश में गुणवत्ता में सर्वश्रेष्ठ दानों की चमक तथा दानों का वजन अधिक
  • दूसरे राज्यों की तुलना में प्रोटीन की मात्रा 1 प्रतिशत अधिक
  • अभी तक प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का प्रयास किया गया
  • वर्तमान में विकसित किस्में सूक्ष्म तत्वों से भरपूर है।
  • विश्वविद्यालय से विकसित किस्में जे.डब्ल्यू. 1202 एवं जे.डब्ल्यू. 1203 में, देश में विकसित अन्य किस्मों की अपेक्षा सबसे अधिक प्रोटीन।
  • वर्तमान में विश्वविद्यालय विकसित किस्मों में सबसे अधिक ‘‘विटामिन ए‘‘।
  • सबसे अधिक लोहा, जिंक तथा मैगनीज।