मक्के की उन्नत खेती करके किसान कमा सकता है तगड़ी कमाई , जानिए मक्के की उन्नत खेती से जुडी सम्पूर्ण जानकारी

By दिगम्बर बर्डे

Published on:

Follow Us

मक्का का वानस्पतिक नाम जिया मेज़ है। मक्का एक प्रमुख खाद्य फसल हैं, जो मोटे अनाजो की श्रेणी में आता है। भारत में मक्का पूरे साल उगाया जाता है. मक्का एक प्रमुख खाद्य फसलो की श्रेणी में आता हैं, जो मोटे अनाजो की श्रेणी में आता है। भारत में मक्का पूरे साल उगाया जाता है। यह मुख्य रूप से खरीफ की फसल है, जिसमें सीजन में लगभग 85 प्रतिशत क्षेत्र में मक्के की खेती की जाती है। चावल और गेहूं के बाद मक्का भारत में तीसरी सबसे महत्वपूर्ण अनाज की फसल है। देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत इसका हिस्सा है

खेत की तैयारी

image 693

मक्के के लिए खेत की तयारी का भी कोई कठिन काम नही है मक्का की खेती के लिए बुवाई से पहले 2-3 बार खेत की अच्छी तरह से देशी हल या कल्टीवेटर से अच्छी तरह से जुताई करे,ताकि मिट्टी भुरभुरि हो जाये फिर इसके बाद पाटा चलाकर बुवाई के लिए खेत तैयार करे |

यह भी पढ़े –अनार की खेती कैसे की जाती है, जानिए अनार की वैज्ञानिक खेती करने का तरीका

मक्का बुवाई का समय

मक्का खरीफ रबी और जायद तीनो में बोया जाता है देर से पकने वाली मक्का की बुवाई मध्य मई से मध्य जून तक पूरी कर लेनी चाहिए, बुवाई के 15 दिन बाद खेत की पहली निराई होना बहुत जरूरी है। शीघ्र पकने वाली मक्का की बुवाई जून के अंत तक पूरी कर लेनी चाहिए तथा बरसात के समय वाली 10 जुलाई तक पूरी कर लेनी चाहिए

खरीफ – जून से जुलाई तक।
रबी – अक्टूबर से नवम्बर तक।
जायद – फरवरी से मार्च तक।

image 695

बीज की मात्रा

मक्का देशी छोटे दाने वाली प्रजाति के लिए 16-18 किलोग्राम, संकर के लिए 20-22 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और संकुल प्रजातियों के लिए 18-20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बुवाई करते हैं।

बुवाई का तरीका

बीज को हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और सीडड्रिल की सहायता से मेंड़ बनाकर किया जाता है। बीजों को 3-4 सैं.मी. गहराई में बीजें। स्वीट कॉर्न की बिजाई 2.5 सैं.मी. गहराई में करें।

मक्के की उन्नत किस्में

संकर जातियां – गंगा-1, गंगा-4, गंगा-11, डेक्कन-107, केएच-510, डीएचएम-103, डीएचएम-109, हिम-129, पूसा अर्ली हा-1 व 2, विवेक हा-4, डीएचएम-15 आदि।

मक्के की खेती के लिए उपर्युक्त भूमि

image 694

मक्का की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। परंतु मक्का की अच्छी उत्पादकता के लिए दोमट एवं मध्यम से भारी मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश वाली भूमि उपयुक्त रहती है। इसके लिए ऐसी भूमि हो जहां पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त होती है।

यह भी पढ़े –Auto मार्केट का तूफान Bullet 350 के नई लुक और फीचर्स बना रहे सबको दीवाना, किफायती कीमत में Jawa को हड़का रही दूर

कटाई व उपज

चारे वाली फसल बोने के 60-65 दिन बाद, दाने वाली देशी किस्म बोने के लगभग 75-85 दिन बाद, व संकर एवं संकुल किस्म बोने के 90-115 दिन बाद तथा दाने मे लगभग 25 प्रतिशत् तक नमी हाने पर कटाई करनी चाहिए। अच्छा होगा अगर आप भुट्टों को बाजार मे ले जाने से पहले इसे धूप में सूखा ले और दानों में 13-14 पर्तिशत तक की नमी होनी चाहिए. उचित भडारण के लिए दानों को सुखाने की प्रक्रिया तब तक करनी चाहिए जब तक कि उनमें नमी का अंश लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक न हो जाए