Hindu Dharm Ke 18 Puran: ज्ञान और आस्था का खजाना है यह हिंदू धर्म के 18 पुराण, जानिए सबके बारे में

By charpesuraj5@gmail.com

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Hindu Dharm Ke 18 Puran: हिंदू धर्म में 18 पुराणों का विशेष महत्व है. ये सभी ग्रंथ न सिर्फ धार्मिक आस्था का आधार माने जाते हैं, बल्कि इनमें इतिहास, ज्योतिष, आयुर्वेद, ज्योतिष और कई अन्य विषयों की विस्तृत जानकारी भी मिलती है. आज के इस लेख में भोपाल निवासी ज्योतिषाचार्य योगेश चौरे जी से हम इन 18 पुराणों के बारे में विस्तार से जानेंगे:

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  1. ब्रह्म पुराण (Brahma Purana):

मान्यता है कि ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीन पुराण है. इसमें सृष्टि की रचना का उल्लेख मिलता है. साथ ही मनुवंश, पृथ्वी, प्राणी, देवी-देवता, जन्म-मृत्यु, स्वर्ग-नरक, तीर्थस्थानों आदि का वर्णन है.

  1. पद्म पुराण (Padma Purana):

यह पुराण सृष्टि की उत्पत्ति का विस्तृत वर्णन करता है. इसमें बताया गया है कि किस प्रकार भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया.

  1. विष्णु पुराण (Vishnu Purana):

विष्णु पुराण में भगवान विष्णु की कथाओं और उनके कार्यों का वर्णन मिलता है. इसे सभी पुराणों में सबसे छोटा माना जाता है, जिसे महर्षि पराशर ने लिखा था.

  1. शिव पुराण (Shiva Purana):

इस पुराण में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, महिमा और उनके कारनामों का विस्तृत वर्णन है. शिवपुराण में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का भी वर्णन मिलता है.

  1. भागवत पुराण (Bhagwat Purana):

भागवत पुराण में भगवान विष्णु के सभी अवतारों और उनकी कथाओं का सिलसिलेवार वर्णन मिलता है. साथ ही इसमें भक्ति योग का भी वर्णन है.

  1. नारद पुराण (Narada Purana):

इसे महापुराण भी कहा जाता है. नारद पुराण को सभी पुराणों का सार माना जाता है. इसमें व्याकरण, ज्योतिष, कल्प और शिक्षा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है.

  1. मार्कण्डेय पुराण (Markandeya Purana):

यह पुराण काफी प्राचीन माना जाता है. इसमें वैदिक देवता इंद्र, सूर्य और अग्नि का वर्णन मिलता है.

  1. अग्नि पुराण (Agni Purana):

इस पुराण में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, भगवान गणेश, शिवलिंग, मां दुर्गा, सूर्यदेव और प्राण प्रतिष्ठा का विस्तृत वर्णन है.

  1. भविष्य पुराण (Bhavishya Purana):

भविष्य पुराण में भविष्यवाणियों के बारे में बताया गया है. साथ ही इसमें 12 महीनों के निर्माण और विक्रम-बेताल की कथाओं का भी उल्लेख मिलता है.

  1. ब्रह्मवैवर्त पुराण (Brahmavaivarta Purana):

यह दसवां पुराण है, जिसमें आयुर्वेद से जुड़ी जानकारी दी गई है. साथ ही इसमें भगवान कृष्ण और राधा रानी की गोलोक लीलाओं का वर्णन है.

  1. लिंग पुराण (Linga Purana):

यह अठारह पुराणों में से एक है, जिसमें शिवलिंग का वर्णन मिलता है. साथ ही इसमें भगवान शिव के 28 अवतारों का भी वर्णन है.

  1. वराह पुराण (Varaha Purana):

इस पुराण में भगवान विष्णु के वराह अवतार का विस्तृत वर्णन है. वराह पुराण में पृथ्वी को उबारने के लिए भगवान विष्णु के वराह रूप धारण करने की कथा का वर्णन मिलता है.

  1. स्कन्द पुराण (Skanda Purana):

यह पुराण भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है. स्कन्द पुराण में कार्तिकेय के पराक्रमों, शिव जी की महिमा, सती का चरित्र, शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध की कथाएं मिलती हैं. स्कन्द पुराण को सभी पुराणों में सबसे बड़ा माना जाता है.

  1. वामन पुराण (Vaman Purana):

इस पुराण में भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा का वर्णन मिलता है. साथ ही शिवलिंग पूजा, भगवान गणेश, स्कन्द और शिव-पार्वती विवाह की कथा का भी वर्णन है.

  1. कूर्म पुराण (Kurma Purana):

यह पुराण चारों वेदों का सार माना जाता है. इसमें भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की कथा और उनके उपदेशों का विस्तृत वर्णन मिलता है. समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने कूर्म का रूप धारण किया था, जिसका वर्णन इस पुराण में मिलता है.

  1. मत्स्य पुराण (Matsya Purana):

इस पुराण में भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा का वर्णन मिलता है. साथ ही सतयुग से लेकर कलयुग तक के राजाओं की वंशावली का भी वर्णन है.

  1. गरुड़ पुराण (Garuda Purana):

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की घटनाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है. इसमें जन्म, मृत्यु, कर्म, आत्मा, पाप और पुण्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है.

  1. ब्रह्माण्ड पुराण (Brahmanda Purana):

यह अठारहवां और अंतिम पुराण है. इसमें सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है. ब्रह्माण्ड पुराण में बताया गया है कि किस प्रकार देवी-देवताओं ने मिलकर इस सृष्टि का निर्माण किया.

निष्कर्ष (Conclusion):

अगले 18 पुराण हिंदू धर्म के धर्मग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. ये ग्रंथ न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं.