गेहू की इन किस्मो से होगी ताबड़तोड़ कमाई, किसानो को होंगे कई सारे फायदे

By दिगम्बर बर्डे

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सरकार ने हाल ही में खान-पान में गड़बड़ी और रासायनिक खाद, बीज के चलते मधुमेह और हृदय रोग से लोग ग्रसित हो रहे लोगो के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने इस बीमारियों को जड़ से खतम करने के लिए इसे देखते हुए बिहार सरकार कृषि विभाग पारंपरिक फसलों की किस्मों को बढ़ावा देगी. इससे हमारा शरीर तंदुरुस्त होगा और बीमारियों का खतरा नहीं रहेगा।

गेहूं की पारंपरिक किस्मों की खेती को बढ़ावा

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गेहू की पारम्परिक किस्मो की बात करे तो गेहू की हाइब्रिड बीज की तुलना में परमपारीक किस्मो में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है मौसम में गेहूं की पारंपरिक किस्मों सोना-मोती, वंशी, टिपुआ गेहूं को बढ़ावा देने की योजना तैयार की है.

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बीपी, शुगर मरीजों के लिए रामबाण

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गेहू की इन किस्मो से उत्पादित होने वाले गेहू में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है गेहू की ये किस्में मधुमेह, रक्तचाप और हृदय रोग से ग्रसित लोगों के लिए फायदेमंद है. गेहूं की पारंपरिक किस्में रोग प्रतिरोधी क्षमता अधिक होती है. इन किस्मों में मुख्यता उच्च प्रोटीन संघटकों में होती है. ये प्राकृतिक रूप से पोषण और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होती हैं.

किसी भी मौसम में अनुकूल

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पारम्परिक गेहू की किस्मे किसी भी तरह की जलवायु में ज्यादा उत्पादन देती है. पारम्परिक किस्मो के गेहू की खेती जैविक तरीके से की जनि चाहिए. ये किस्में कम अवधि और उच्च उत्पादकता वाली हैं. जलवायु परिवर्तनों के प्रति सहनशील हैं. ये किस्में समय के साथ स्थानीय वातावरण और पर्यावरण के अनुकूल है. पारम्परिक गेहू की किस्मो की खेती में लगत की बात करे तो लगत बहुत काम आती है.

रोग प्रतिरोधी क्षमता

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पारम्परिक गेहू की किस्मो में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होती है इसकी वजह से फसल को कोई रोग नहीं लगता जिससे फसल की कोई हानि नहीं होती है और जीवाणु और जैविक उपचारों के बिना संरक्षित रूप से उगाई जा सकती है. इस कारण किसानों को भी इसका फायदा होगा.

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कम समय में आदिक उत्पादन ले सकते है

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गहु की पारम्परिक किस्मे आधुनिक किस्मो की अपेक्षा कम समय में पक जाती है और ज्यादा उत्पादन देती है. इस कारण किसानों को भी इसका फायदा होगा.