Kheti kisani: गांव कस्बे का शख्स खेती से कमा रहा मोटा पैसा, जाने कैसे…

By Alok Gaykwad

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Kheti kisani: गांव कस्बे का शख्स खेती से कमा रहा मोटा पैसा, जाने कैसे, बिहार में आजकल युवा भी बड़े पैमाने पर खेती की ओर रुख कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ युवा खेती को आजीविका के तौर पर भी अपना रहे हैं. ऐसे में कृषि क्षेत्र में युवा किसानों द्वारा नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि समय के साथ कृषि क्षेत्र में बदलाव लाया जा सके. पहले जहां किसान सिर्फ रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए खेती किया करते थे, वहीं अब उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप से करना शुरू कर दिया है.

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इसके फलस्वरूप ना सिर्फ मुनाफा बढ़ा है बल्कि युवा सफल किसान के रूप में भी उभर कर सामने आ रहे हैं. साथ ही वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं. ऐसे ही एक तरक्कीपसंद युवा किसान विवेक कुमार की कहानी बताते हैं, जो मल्टीलेयर खेती कर कृषि क्षेत्र में बदलाव लाकर मोटी कमाई कर रहे हैं.

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सरकारी मदद से बदलने लगी किस्मत

बेगूसराय जिले के बरौनी ब्लॉक के कुमारसो पंचायत के संजय कुंवर के बेटे विवेक कुमार ने लोक 18 को बताया कि इंटरमीडिएट पास करने के बाद किसान चौपाल से प्रेरणा लेकर उन्होंने खेती की शुरुआत की. शुरुआत में उन्होंने 5 कट्ठा जमीन में बैंगन की खेती की. इससे होने वाली आमदनी को देखते हुए उन्होंने 10 कट्ठा जमीन में पहली बार परवल की खेती की. इस दौरान उन्होंने देखा कि हरी सब्जियों की खेती में उन्हें धीरे-धीरे अच्छी आमदनी हो रही है.

प्रशांत की गोष्ठी में जाकर ड्रिप सिंचाई तकनीक की जानकारी लेते हुए, सरकारी योजना का 80% अनुदान प्राप्त कर अपने खेतों में ड्रिप लगवाकर मल्टीलेयर खेती शुरू कर दी. फिलहाल वह एक एकड़ में परवल की खेती के साथ-साथ उसी खेत में टमाटर, करेला, करेला, साग और अन्य मौसमी हरी सब्जियां भी लगाते रहते हैं.

हर महीने 32 से 40 हजार की कमाई

युवा किसान विवेक कुमार का कहना है कि मल्टीलेयर खेती में कम पानी की ज़रूरत होती है. दरअसल, एक ही खेत में सभी फल सब्जियां लगाई जाती हैं. ऐसे में एक फल की सिंचाई करने से दूसरी फल सब्जियों को भी पानी मिल जाता है. इस तरह से करीब 60-70 फीसदी कम पानी की खपत होती है. वहीं, ड्रिप इरिगेशन की वजह से सिंचाई भी सौर ऊर्जा से हो जाती है. इस दौरान खेती में खाद का इस्तेमाल भी इस तकनीक से कम हो जाता है. उन्होंने बताया कि 10 कट्ठा जमीन से 7 दिनों में 8 क्विंटल परवल का उत्पादन होता है. वहीं, एक एकड़ से हर महीने 32 से 40 हजार रुपये के परवल की बिक्री मार्केट में हो जाती है. जबकि इसमें लगने वाली लागत टमाटर और बैंगन से निकल आती है.