गर्मियों में डेयरी पशुओं के दूध उत्पादन को दुगना कर देंगी ये खास हरी घास, जाने खासियत और घास की उन्नत किस्म…

By Alok Gaykwad

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गर्मियों में डेयरी पशुओं के दूध उत्पादन को दुगना कर देंगी ये खास हरी घास, जाने खासियत और घास की उन्नत किस्म, लोबिया की खेती मुख्य रूप से सिंचित इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. यह गर्मियों और खरीफ सीजन का तेजी से उगने वाला, पौष्टिक और स्वादिष्ट चारा फसल है. हरे चारे के अलावा लोबिया को अकेले या मिश्रित फसल के रूप में दाल, हरी बीन्स (सब्जियां) और हरी खाद के रूप में भी उगाया जाता है.

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हरे चारे की गुणवत्ता बढ़ेगी

हरे चारे की अधिक पैदावार के लिए सिंचित क्षेत्रों में मई में और वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश शुरू होते ही इसकी बुवाई करनी चाहिए. मई में बोई गई फसल से हरा चारा जुलाई में ही मिल जाता है, वो भी चारे की कमी के समय. अगर किसान लोबिया को ज्वार, बाजरा या मक्का के साथ 2:1 के अनुपात में लाइनों में उगाते हैं, तो इन फसलों के साथ चारे की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है.

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गर्मियों में डेयरी पशुओं के दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए लोबिया का चारा जरूर खिलाएं

गर्मियों में डेयरी पशुओं के दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए लोबिया का चारा खिलाना बहुत जरूरी है. इसके चारे में औसतन 15-20% प्रोटीन और सूखे दानों में लगभग 20-25% प्रोटीन पाया जाता है.

उन्नत किस्मों का चयन

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, किसान लोबिया की उन्नत किस्मों को लगाकर चारे का उत्पादन बढ़ा सकते हैं. लोबिया सीएस 88 एक बेहतरीन किस्म है जो चारे की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह सीधी बढ़ने वाली किस्म है जिसके पत्ते गहरे हरे और चौड़े होते हैं. यह किस्म विभिन्न रंगों, विशेष रूप से पीले मोज़ेक विषाणु रोग के लिए प्रतिरोधी है और इसमें कीट भी नहीं लगते.

इस किस्म को गर्मियों और खरीफ सीजन में सिंचित और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में बोया जा सकता है. इसका हरा चारा लगभग 55-60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है. हरे चारे की पैदावार लगभग 140-150 क्विंटल प्रति एकड़ होती है.

मिट्टी और खेती की विधि

लोबिया की खेती के लिए जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, लेकिन इसे रेतीली मिट्टी में भी आसानी से उगाया जा सकता है. लोबिया की अच्छी पैदावार लेने के लिए किसानों को खेत को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए. इसके लिए 2-3 जुताईयां ही काफी होती हैं. पौधों की उचित संख्या और वृद्धि के लिए 16-20 किग्रा बीज प्रति एकड़ उपयुक्त रहता है. कतारों के बीच 30 सेमी की दूरी रखते हुए छेद बनाकर या ड्रिल से बुवाई करें. लेकिन जब मिश्रित फसल बोई जाती है, तो लोबिया की मात्रा का केवल एक तिहाई भाग ही प्रयोग करें. बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए.

बीज उपचार जरूरी है

लोबिया के बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें और फिर बुवाई करें. फसल की अच्छी वृद्धि के लिए बुवाई से पहले 10 किग्रा नाइट्रोजन और 25 किग्रा फॉस्फोरस प्रति एकड़ की दर से कतारों में डालें. यह एक फलदार फसल होने के कारण इसे ज्यादा नाइट्रोजन उर्वरक की जरूरत नहीं होती है. मई में बोई गई फसल को 15 दिन में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है.