नवंबर महीने में श्री विधि से गेहूं की इन किस्मो को बोने से तीन गुना बढ़ेगा उत्पादन 110 दिन में फसल होगी तैयार

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नवंबर महीने में श्री विधि से गेहूं की इन किस्मो को बोने से तीन गुना बढ़ेगा उत्पादन 110 दिन में फसल होगी तैयार श्री विधि से बोएं गेहूं, ढाई-तीन गुना बढ़ेगा उत्पादन धान की तर्ज पर गेहूं की खेती भी किसान यदि ‘श्री’ पद्धति गेंहू सघनीकरण पद्धति (SWI) से करें तो गेंहू के उत्पादन में ढाई से तीन गुना वृद्धि हो सकती है। प्रयोगो से पता चला है कि गेहूं की बुवाई वर्गाकार विधि के तहत कतार व पौधों के बीच पर्याप्त दूरी स्थापित करने से पौधों की समुचित वृद्धी और विकास होता है, इससे उनमें स्वस्थ कसे तथा पुष्ट बालियों का निर्माण होता है, फलस्वरूप अधिक उपज प्राप्त होती है।

नवंबर महीने में श्री विधि से गेहूं की इन किस्मो को बोने से तीन गुना बढ़ेगा उत्पादन 110 दिन में फसल होगी तैयार

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इस विधि से खेती करने पर गेहूं की खेती लागत परंपरागत विधि की तुलना में आधी आती है। सामान्यतौर पर नवंबर-दिसंबर के मध्य में बुवाई कर लें। कृषि विज्ञान खंडवा में पदस्थ वैज्ञानिक एसएस रावत का कहना है बीजों को कतार में 20 सेमी की दूरी में लगाए। इसके लिए देशी हल या पतली कुदाली की सहायता से 20 सेमी की दूरी पर 3 से 4 सेमी गहरी नाली बनाते है और इसमें 20 सेमी. की दूरी पर एक स्थान पर 2 बीज डालते है। बुवाई बाद बीज को हल्की मिट्टी से ढंक देते है। बुवाई के 2-3 दिन में पौधे निकल आते है। कतार तथा बीज के मध्य वर्गाकार (20 बाय 20 सेमी) की दूरी रखने से प्रत्येक पौधे के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।

नवंबर महीने में श्री विधि से गेहूं की इन किस्मो को बोने से तीन गुना बढ़ेगा उत्पादन 110 दिन में फसल होगी तैयार

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HI-8663 (Nutrition) एचआई-8663 (पोषण)

खासियत : उच्च गुणवत्ता, ज्यादा उत्पादन वाला गेहूं है। यह गर्मी को सह सकता है। 120-130 दिन में पककर तैयार हो जाती है। उपज 50-55 क्विंटल होती है।

Pusa Tejas : One Hect. in 75 quintal production पूसा तेजस : एक हेक्टे. में 75 क्विंटल उत्पादन


नई गेहूं किस्म पूसा तेजस को मध्य भारत के लिए चिह्नित किया है। यह प्रजाति तीन-चार सिंचाई में पककर तैयार हो जाएगी। उत्पादन 55-75 क्विंटल प्रति हेकटेयर होगा। पूसा तेजस से चपाती के साथ पास्ता, नूडल्स और मैकरॉनी जैसे खाद्य पदार्थ भी बना सकते हैं। ये प्रजाति प्रोटीन, विटामिन-ए, आयरन व जिंक जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध है। कृषि मंत्रालय की सेंट्रल वैराइटी रिलीज कमेटी की मंजूरी मिल गई है। अब किसान फसल ले सकते हैं।

Pusa Ujala: 55-75 quintal production in one hectare पूसा उजाला : एक हेक्टेयर में 55-75 क्विंटल उत्पादन

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भारतीय अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने गेहूं की दो नई प्रजाति विकसित की है। आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक कृषि विस्तार डॉ.अनिल कुमार सिंह का कहना है नई गेहूं प्रजाति पूसा उजाला की पहचान ऐसे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए की गई है जहां सिंचाई की सीमित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस प्रजाति से एक-दो सिंचाई में 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार होती है। इसमें प्रोटीन, आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा होती है।

J-W 3336 जे-डब्ल्यू 3336

खासियत : न्यूट्रीफार्म योजना के तहत विकसित किया है। इसमें जिंक प्रचुर मात्रा में होता है। दो-तीन सिंचाई में फसल तैयार होगी। 110 दिन की फसल है। 50-60 क्विंटल उत्पादन मिलेगा।