बुधवार के दिन बिगड़े कामों को बनाने के लिए करें ये उपाय, जानिए

By charpesuraj4@gmail.com

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हिंदू धर्म में हर दिन किसी ना किसी देवता को समर्पित होता है. उसी तरह बुधवार का दिन भगवान शिव के पुत्र गणेश जी को समर्पित है. इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है. साथ ही सभी तरह की बाधाओं को दूर करने के लिए व्रत भी रखा जाता है. मान्यता है कि बुधवार के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही व्यक्ति को धन संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है. आइए जानते हैं कि आप बुधवार के दिन किन उपायों से बिगड़े कामों को बना सकते हैं.

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सुबह स्नान कर के करें गणेश जी की पूजा (Subah Snan Kar Ke Karen Ganesh Ji Ki Puja)

अगर आप अपने किसी बिगड़े काम को बनाना चाहते हैं तो बुधवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा करें. पूजा के समय उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाएं. मोदक भगवान गणेश को बहुत प्रिय है.

गणेश स्तोत्र का पाठ करें (Ganesh Stotra Ka Paath Karen)

इसके अलावा आप गणेश जी की कृपा पाने के लिए गणेश स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं. सच्चे मन से किया गया गणेश स्तोत्र का पाठ लाभकारी होता है. ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में चल रहे सभी तरह के दुख और परेशानियां दूर हो जाती हैं.

बुधवार व्रत रखें (Budhwar Vrat Rakhlein)

अगर आप चाहते हैं कि आपका बिगड़ा हुआ काम जल्द ही बन जाए तो आप बुधवार का व्रत भी रख सकते हैं. व्रत रखने से गणेश जी जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.

इन उपायों को करने से आपको आपके बिगड़े कामों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. लेकिन ध्यान रहे कि सिर्फ उपाय करना ही काफी नहीं है, आपको अपने कर्मों पर भी भरोसा रखना चाहिए.

गणेश स्तोत्र (Ganesha Stotram)

प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।

भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥

प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।

तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥

लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।

सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥

नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।

न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।

पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥

जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।

संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।

तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥

॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

संतान गणपति स्तोत्र

नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धी बुद्धि युताय च।

सर्वप्रदाय देवाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च।।

गुरु दराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते।

गोप्याय गोपिताशेष भुवनाय चिदात्मने।।

विश्व मूलाय भव्याय विश्वसृष्टि करायते।

नमो नमस्ते सत्याय सत्य पूर्णाय शुण्डिने।।

एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नम:।

प्रपन्न जन पालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।

शरणं भव देवेश सन्तति सुदृढ़ां कुरु।

भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गण नायक।।

ते सर्वे तव पूजार्थम विरता: स्यु:रवरो मत:।

पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्व सिद्धि प्रदायकम्।।