भारत में चावल निर्यात के बैन की खबर से मची सनसनी, मात्र 4 दिन मे दुनिया में इतनी बड़ी महंगाई

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भारत में चावल निर्यात के बैन की खबर से मची सनसनी, मात्र 4 दिन मे दुनिया में इतनी बड़ी महंगाई भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. गेहूं की बढ़ती कीमतों की वजह से आम- आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.

भारत में चावल निर्यात के बैन की खबर से मची सनसनी bharat mein chaaval niryaat ke ban kee khabar se machee sanasane

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सरकार ने रोक लगाने का फैसला बढ़ती मंहगाई को देखते हुए लिया था. पहले गेहूं और चीनी की समस्या थी और दोनों वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी. इसलिए भारत ने गेहूँ के निर्यात पर रोक थोप दिया और चीनी के निर्यात पर भी नियंत्रण कर लिया. अब सरकार ने दोबारा चावल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है. दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत में 9 सितंबर को चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. 

सरकार ने इसलिए लिया फैसला The government took the decision because

केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने जानकारी देते हुए बताया मौजूदा खरीफ सीजन में धान की बुवाई क्षेत्र में गिरावट के कारण करोड़ों को तादाद में नुकसान झेलना पड़ा है. मानसून की औसत से कम बारिश के कारण चावल के उत्पादन में 1-12 मिलियन टन की गिरावट देखने को मिली है, इसके कारण स्थानीय बाजारों में चावल की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है. साथ ही सरकार ने निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए गैर-बासमती चावल पर 20% का सीमा शुल्क भी लगाया है. हालांकि उसना राइस को इससे बाहर रखा गया है. इसके अलावा टूटे हुए चावल पशुओं के चारे के लिए भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है. इसका उपयोग इथेनॉल में मिश्रण के लिए भी किया जाता है. 

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सरकार के इस फैसले से मचा विदेशों में हहाकार This decision of the government caused outcry in foreign countries

भारत चावल उत्पादन करने में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. चावल खाद्यान्न के वैश्विक व्यापार का 40% हिस्सा है. भारत द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, एशिया में व्यापार लगभग ठप हो गया है, क्योंकि भारतीय व्यापारी अब नए समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. नतीजतन, खरीदार वियतनाम, थाईलैंड और म्यांमार जैसे Options की तलाश कर रहे हैं. लेकिन इन देशों के व्यापारियों ने मौके का फायदा उठाकर कीमतों में इजाफा किया है. 

अब चावल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण Now control the rising prices of rice 

Rice

यूक्रेन युद्ध के बाद से खाद्यान्न की मांग और आपूर्ति में असंतुलन रहा है. पहले गेहूं और चीनी की समस्या थी और दोनों वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी. हाल ही में भारत ने गेहूँ के निर्यात पर रोक थोप दिया और चीनी के निर्यात पर भी नियंत्रण कर लिया. अब सरकार चावल की बढ़ती कीमतों पर भी नियंत्रण करना चाहती है. भारत दुनिया के 150 से अधिक देशों को चावल का निर्यात करता है. इसलिए इस चावल निर्यात के प्रतिबंध का सीधा असर उन देशों में कीमतों पर पड़ता है. यूरोप और अमेरिका के कई क्षेत्र ऐतिहासिक सूखे से जूझ रहे हैं और यूक्रेन युद्ध का असर भी विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा रहा है.