बकरीद पर बकरे के दांत क्यों गिने जाते हैं, जाने पूरी जानकारी…

By Alok Gaykwad

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बकरीद पर बकरे के दांत क्यों गिने जाते हैं, जाने पूरी जानकारी, ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस साल भारत में 17 जून को मनाया जा रहा है. यह इस्लाम के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है. जैसा कि आप जानते हैं, इस्लाम में साल में दो ईदें मनाई जाती हैं. एक मीठी ईद होती है और दूसरी बकरीद. ईद खुदा पर श्रद्धा रखने और अपना कर्तव्य निभाने का त्योहार है. बकरीद के मौके पर बकरा कुर्बान किया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार ये त्योहार साल के आखिरी महीने की दसवीं तारीख को मनाया जाता है.

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लेकिन बकरीद पर बकरे के दांत आखिर गिने क्यों जाते हैं? ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि माना जाता है कि सिर्फ एक साल का बकरा ही कुर्बानी के लिए योग्य होता है. इसलिए, अगर बकरे के दो, चार या छह दांत हैं, तभी उसे कुर्बानी के लिए चुना जाता है.

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न तो बहुत छोटे बच्चे वाले बकरे को लिया जाता है और ना ही बहुत बूढ़े बकरे को. अगर बकरे के दांत नहीं निकले हैं या फिर उसे दो से ज्यादा, चार से ज्यादा या छह से ज्यादा दांत हैं, तो ऐसे बकरे को कुर्बानी के लिए नहीं लिया जाता.