बैंगन भारत की दूसरी सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जी मानी जाती है, आप भी बैंगन की खेती कर कमा सकते हो अच्छा मुनाफा

0
270
baigan ki kheti

बैंगन भारत की दूसरी सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जी मानी जाती है, आप भी बैंगन की खेती कर कमा सकते हो अच्छा मुनाफा आलू के बाद दूसरी सबसे अधिक खपत वाली सब्जी फसल है | विश्व में चीन के बाद भारत बैंगन की दूसरी सबसे अधिक पैदावार वाला देश है । बैंगन भारत का देशज है । प्राचीन काल से भारत में इसकी खेती होती आ रही है। ऊँचे भागों को छोड़कर समस्त भारत में यह उगाया जाता है। बैंगन का प्रयोग सब्जी, भुर्ता, कलौंजी तथा व्यंजन आदि बनाने के लिये किया जाता है | भारत मे तो छोटे बैंगन की प्रजाति का प्रयोग संभार बनाने में भी किया जाता है | देश में बैगन की मांग 12 महीने बनी रहती है | स्थानीय मांग के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों व प्रान्तों में बैंगन की अलग–अलग किस्में प्रयोग में लाई जाती है |

baingan ki unnat kismen

कम लागत में अधिक उपज व आमदनी के लिये उन्नतशील किस्मों एवं वैज्ञानिक तरीकों से खेती करना आवश्यक है ।यदि आप बैंगन की खेती कब और कैसे करनी चाहिए । बैंगन की उन्नत किस्में कौन-कौन सी है । बैंगन में गोबर की खाद कितनी डालनी चाहिए । बैंगन में उर्वरक की मात्रा क्या होनी चाहिए जानना चाहते हैं तो आपको इस पोस्ट में संपूर्ण जानकारी दी गई है।

image 1357

बैगन की फसल के लिए भूमि का चयन Selection of Land for Cultivation of Brinjal

बैंगन का पौधा कठोर होने के कारण विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है. बैगन की खेती से अच्छा उत्पादन लेने के के लिए 5 से 7 पी एच वाली उपजाऊ रेतीली दोमट मिट्टी, ढीली व भुरभुरी दोमट मिट्टी या कार्बनिक पदार्थों से धनी चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। अगेती फसल के लिए रेतीली दोमट भूमि तथा अधिक पैदावार के लिए मटियार दोमट भूमि अच्छी मानी गई है। जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। बैंगन की कुछ किस्में प्रतिकूल मिट्टी की स्थिति में अनुकूल होती हैं. इसलिए क्षेत्र व मिट्टी के अनुसार बैगन की किस्म का चयन करना फसल की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

बैगन की फसल के लिए खेत की तैयारी (Soil Preparation for Brinjal Cultivation)

बैगन की फसल के लिए खेत की तैयारी अच्छे से करना चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए. उसके बाद 3 से 4 बार हैरो या देशी हल चलाकर पाटा लगाये भूमि के प्रथम जुताई से पूर्व गोबर की खाद डालनी चाहिए। अगर गोबर की खाद उपलब्ध नहीं है तो हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए। आखरी जुताई 5% aaldrin 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालकर करनी चाहिए। ऐसा करने से यह पौधों को दीमक और अन्य भूमिगत कीड़ो से होने वाले नुकसान से बचाएगा। पौध की रोपाई करने से पूर्व सिचाई सुबिधा के अनुसार भूमि को क्यारियों तथा सिंचाई नालियों में विभाजित कर लेना चाहिए जिससे सिंचाई में कोई परेशानी नहीं होगी।

बैंगन की खेती के लिए जलवायु और तापमान (Climate and temperature for Brinjal Farming)

बैंगन की फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए इसे गर्म मौसम में लगाया जाता है। ठंड के मौसम में कम तापमान होने के कारण फलों की विकृति का कारण बनता है। बैगन की नर्सरी डालते समय 25 डिग्री सेल्सिअस तापमान होना चाहिए जिससे बीजों का अंकुरण अच्छा होता है तथा अच्छे उत्पादन के लिए 15 से 25 डिग्री तापमान होना चाहिए। अगर तापमान 15 डिग्री से कम या 25 डिग्री से ज्यादा है तो पौधों पर फूल बनना बंद हो जाता है। अगर इस अवस्था में भी फूल आते है तो वे गिर जाते है. जब तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से कम हो तो ऐसे समय में पौधों की रोपाई नहीं करनी चाहिए, लम्बे फल वाली किस्मों की अपेक्षा गोल फल वाली किस्मे पाले के लिए सहनशील होती है तथा अधिक पाले के कारण पौधे मर जाते है या झाड़ीनुमा हो जाते है।

brinjal 1548383 1024x768 1

बैंगन की फसल के लिए खाद एवं उर्वरक की मात्रा। Quantity and fertilizer quantity for the cruciful crop

बैंगन की अच्छी पैदावार के लिए हमें 15 गाड़ी पुरानी गोबर की खाद को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से देना होता है | गोबर की खाद के स्थान पर वर्मी कम्पोस्ट खाद को भी इस्तेमाल में ला सकते है |

खेत में खाद को डालने के बाद कल्टीवेटर के माध्यम से दो से तीन तिरछी जुताई कर दी जाती है, इससे खेत की मिट्टी में गोबर की खाद अच्छे से मिल जाती है | खाद को मिट्टी में मिलाने के बाद खेत में पानी लगाकर पलेव कर दिया जाता है | पलेव के कुछ दिन बाद जब खेत की मिट्टी ऊपर से सूखी दिखाई देने लगे तब रोटावेटर लगवा कर जुताई कर दे, इससे खेत की मिट्टी में मौजूद मिट्टी के ढेले टूट जाते है औऱ मिट्टी भुरभुरी हो जाती है | इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर दिया जाता है |

इसके अतिरिक्त यदि आप रासायनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहते है, तो उसके लिए आपको प्रति हेक्टेयर के खेत में तीन बोरे एन.पी.के. की मात्रा को आखरी जुताई के समय देना होता है | इसके अलावा 20 KG यूरिया की मात्रा को सिंचाई के साथ पौधों पर फूल लगने के दौरान देना होता है |

बैंगन की उन्नत किस्में (Brinjal Improved Varieties)

बैंगन की कई उन्नत किस्मों को उनके आकार, रंग औऱ पैदावार के हिसाब से उगाने के लिए तैयार किया गया है | जिनके बारे में जानकारी इस प्रकार है-

Untitled design 2022 04 16T140316.062

पंत ऋतुराज

इस किस्म के पौधे 60-70 से. मी. ऊँचे, तना सीधा खड़ा, थोडा झुकाव लिए हुए, फल मुलायम, आकर्षक, कम बीज वाले, गोलाकार तथा अच्छे स्वाद वाले होते है | यह किस्म रोपण के 60 दिन बाद तुड़ाई योग्य तैयार हो जाती है | यह किस्म जीवाणु उकठा रोग के प्रति सहिष्णु है तथा दोनों ऋतुओं (वर्षा व ग्रीष्म) में खेती योग्य किस्म है | इसकी औसत पैदावार 400 कु./ हे. होती है |

पंत सम्राट

पौधे 80-120 सें.मी. ऊँचाई के, फल लम्बे, मध्यम आकार के गहरे बैगनी रंग के होते है | यह किस्म फोमोप्सिस झुलसा व जीवाणु म्लानि के प्रति सहिष्णु है | रोपण के लगभग 70 दिनों बाद फल तुड़ाई योग्य हो जाते है | इसके फलों पर तना छेदक कीट का असर कम पड़ता है | वर्षा ऋतु में बुआई के लिए यह किस्म उपयुक्त है | प्रति हैक्टेयर औसतन 300 कुन्टल पैदावार होती है |

काशी संदेश

पौधों की लम्बाई 71 सें.मी. पत्तियों में हलका बैंगनी रंग लिए होते है | फल गहरे बैंगनी रंग के गोलाकार और