Aaj ka Panchang: आज का शुभ मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति और राहुकाल, जानिए आज का पंचांग

By charpesuraj5@gmail.com

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Aaj ka Panchang आज गुरुवार, 20 जून 2024 को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है. आइए आज के पंचांग में विस्तार से जानते हैं कि आज शुभ मुहूर्त, राहुकाल, ग्रहों की स्थिति और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय क्या है.

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आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल (Shubh Muhurat and Rahu Kaal)

  • आज शुभ मुहूर्त – अभिजीत मुहूर्त (Abhijeet Muhurat): 11:58 बजे से 12:46 बजे तक
  • राहुकाल (Rahu Kaal): दोपहर 14:07 बजे से 15:51 बजे तक

ग्रहों की स्थिति ( स्थिति ( स्थिति ( Grahों ki sthiti)

  • चंद्रमा राशि: वृश्चिक (Chandrama Rashi: Vrishchika – Moon in Scorpio)

पंचांग के अंग (Anga of Panchang)

हिंदू धर्म में समय और तिथियों की गणना के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. पंचांग मुख्य रूप से पाँच भागों से मिलकर बना होता है. ये पाँच भाग हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण.

  • तिथि (Tithi): हिंदू समय गणना के अनुसार, चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने के दौरान सूर्य रेखा से ऊपर चंद्र रेखा के 12 डिग्री बढ़ने में लगने वाले समय को तिथि कहा जाता है. एक महीने में 30 तिथियां होती हैं और इन्हीं तिथियों को दो पक्षों में बांटा जाता है – शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha – waxing moon) और कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha – waning moon). शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा (Purnima – full moon) और कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को अमावस्या (Amavasya – new moon) कहा जाता है.
  • नक्षत्र (Nakshatra): आकाश में तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है. कुल 27 नक्षत्र होते हैं और इन नक्षत्रों का स्वामित्व नौ ग्रहों के पास होता है.
  • वार (Var): वार का अर्थ होता है दिन. सप्ताह में सात दिन होते हैं. इन सात दिनों के नाम ग्रहों के नाम पर रखे गए हैं – सोमवार (Monday), मंगलवार (Tuesday), बुधवार (Wednesday), गुरुवार (Thursday), शुक्रवार (Friday), शनिवार (Saturday), रविवार (Sunday).
  • योग (Yoga): नक्षत्रों की तरह ही, 27 प्रकार के योग भी होते हैं. सूर्य और चंद्रमा की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं.
  • करण (Karan): एक तिथि में दो करण होते हैं. एक तिथि के पहले भाग में और दूसरा तिथि के दूसरे भाग में. कुल 11 करण होते हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं – बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विश्ति, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न. विश्ति करण को भद्रा (Bhadra) कहा जाता है और भद्रा में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है.